Saturday, 6 April 2019

“नवरात्रि विशेष” ◦ “संगीत व भक्ति”

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वैसे तो संगीत किसी भी रूप में हो,किसी भी विधा में हो,हमेशा सुखद ही लगता है,लेकिन जब संगीत में भक्ति का रस जुड़ जाये तो वो अभूतपूर्वआनंददायक होता है.यदि श्रद्धा  मन से भक्ति के गीत या भजन गाये जा रहे हैं तो सुनने वालों का मन स्वयं ही ईश्वर से सीधे जुड़ने की कल्पना सेअभिभूत हो जाता है.निश्चय ही जीवन में आप ने भी कभी  कभी ये एहसास किया होगा.यहाँ एक interesting बात और बताती चलूँ की भक्ति मेंसंगीत ना सिर्फ़ हमारे हिन्दु धर्म में बल्कि सभी धर्मों में उतनी ही लोकप्रिय है चाहे वो मुस्लिम हो,सिख हों या ईसाई हो.गा बजा कर ईश्वर कीआराधना करना बहुत प्राचीन और लोकप्रिय विधा है.विषेस कर हिंदू समाज में तो कोई भी मौक़ा हो नाच-गाने का कार्यक्रम शुरू करने से पहलेहमेशा ही,प्रथम पूज्य गणेश जी या देवी गीत गा कर ही आगे का कार्यक्रम किया जाता है
                  संगीत  भक्ति का ऐसा ही सुंदर संगम हमें नवरात्रि में देखने को मिलता है,और हमारा सौभाग्य है की हमें ये अवसर वर्ष में दो बारमिलता है.तो लीजिए एक बार पुनः चैत्र नवरात्रि आपके जीवन में दस्तक दे रहा है,घर-घर में भजन होंगे,गीत-संगीत  मिलना-मिलाना होगा और ऐसेमें सभी चाहते हैं की वो कुछ अलग या बढ़ियाँ देवी गीत गा सकें.प्रयास कर रही हूँ की आप तक कुछ अच्छे देवी गीत पहुँचा सकूँ.साथ ही इस बारप्रयास रहेगा की शुभारम्भ के लिए गणेश वंदना  समाप्ति पर गाया जाने वाला “लांगूरिया” गीत भी इस में जोड़ सकूँ.
                     धन्यवाद सहित सभी को नवरात्रि की बहुत शुभकामनायें.

                               
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श्री गणेश “

पहले ध्यान श्री गणेश का...
भक्ति मन से कर लो भक्तों
गणपति के गुण गाओ
पहले ध्यान...

द्वार द्वार हर घर के आसन पर 
शुभ प्रभु की है प्रतिमा...
देवों में जो देव पूज्य हैं
गणपति की है गरिमा 
मंगल अति सुमंगल हैं जो 
उन को नयन बसाओ 
पहले ध्यान श्री गणेश का
मोदक भोग लगाओ..

पहले ध्यान...
भक्ति मन.....

आरती प्रभु की भोग पूजा 
शंख नाद भी गूँजे...
मंगल जल बरसन से गणपति
तन मन सबका भीजे
सब त्योहार उन्ही से शुभ हैं
गणपति का त्योहारा..
मूषक वाहन श्री गणेश का 
ऐसा देव हमारा...

पहले ध्यान...
भक्ति मन....

कीर्तन भजन नारायण करते 
नर मुनि देव सब के मन हरशे..
गणपति का दर्शन कर के 
जीवन सफल बनाओ
उत्सव आज मनाओ...

पहले ध्यान श्री गणेश का...
भक्ति मन से कर लो भक्तों
गणपति के गुण गाओ...
पहले ध्यान..............


                                
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बाजे ढोलक

बाजे ला ढोलक 
झूमे नगर नगर
लहरे ला मैया के लाली चुनर
बाजे....
सातों बहिनिया लागेलि सुंदर
सब के पे चढल भक्ति के लहर 
बाजे...
लहरे...

बाजे ताली देख देख के 
मैया जी मुसकाली
जयकारा गूँजेला
अरे गूँजे हाली हाली
हटले ना हटे मैया से नज़र 
लहरे मैया...
सातों बहिनिया..

बाजे ला...
सातों बहिनिया..

आपों आएँ हाज़िरी लगाईं
जय माता की बोलीं...
उन से आसिस पा के अपने
भाग्य के ताला खोलीं...
लागल दरबार बा आठों पहर 
लहरे मैया...
सातों बहिनिया..

बाजे ला..
सातों बहिनिया..

दीन दुखिया नर नारी 
सब कोई दर्शन पावे
मैया के दरबार में सब झूमें
नाचे गावे...
सारे सखियन के लचके कमर
लहरे मैया...
सातों बहिनिया..

बाजे ला ढोलक 
झूमे नगर नगर 
लहरे मैया के लाली चुनर.




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हे मात मेरी

कैसी ये देर लगाई माँ दुर्गे
हे मात मेरी हे मात मेरी 
कैसी ये...
हे मात...

भव सागर में गिरी पड़ी हूँ
माया मोह में घीरि पड़ी हूँ
जंजाल जाल में जकड़ी पड़ी हूँ
हे मात मेरी हे मात मेरी 
कैसी ये देर...
हे मात...

ना मुझ में बल है ना मुझ में विद्या
ना मुझ में भक्ति ना मुझ में शक्ती 
चरण तुम्हारे आन पड़ी हूँ
हे मात मेरी हे मात मेरी 
कैसी ये देर...
हे मात...

ना कोई मेरा कूटुंब साथी
ना ही मेरा शरीर साथी 
आप ही उबारो पकड़ के बाँहें
हे मात मेरी हे मात मेरी 
कैसी ये देर..
हे मात...

चरण कमल को नौका बना कर 
मैं पार जाऊँ ख़ुशी मना कर 
यमदूतों को दूर भगा कर
हे मात मेरी हे मात मेरी 
कैसी ये देर..
हे मात..

ना मैं किसी की ना ही कोई मेरा 
छाया है चारों ओर अंधेरा
जला के ज्योति दिखा दो रास्ता 
हे मात मेरी हे मात मेरी 
कैसी ये देर...
हे मात मेरी हे मात मेरी.


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तेरा दर्शन

मैंने सब कुछ पाया दाती 
तेरा दर्शन पाना बाक़ी है
मेरे घर में कोई कमी नहीं 
बस तेरा आना बाक़ी है
मैंने...

जो मेरे घर में आओ माँ
मेरा घर तीरथ बन जायेगा
मैं भी तर जाऊँगा मैया 
जो आयेगा तर जायेगा
इज्जत शोहरत दौलत तो मिली 
मेहरों का ख़ज़ाना बाक़ी है
मैंने सब...

हर मुराद पुरी होती है
माँ तेरे दरबार में
तेरे दर जैसा नहीं दिखा
कोई दर संसार में 
दर दर की ठोकर खाई है
बस तेरा ठिकाना बाक़ी है
मैंने सब...

भक्त तेरे भोले भाले
माँ तेरे शुक्र गुज़ार हैं
तेरी कृपा से सब को मिली
ख़ुशियाँ अपरंपार हैं
तर गए माँ लाखों भक्त तेरे
सेवादार दीवाना बाक़ी है
मैंने सब...

मैंने सब कुछ पाया दाती 
तेरा दर्शन पाना बाक़ी है
मेरे घर में कोई कमी नहीं 
बस तेरा आना बाक़ी है.


लंगूरिया

आप में से शायद बहुत से लोग जानते भी नहीं होंगे की लंगूरिया गीत होता क्या है,तो सोचा क्यूँ ना इस का थोड़ा परिचय आप को दे दूँ.ये गीत मूलतःकरोलि की कैला देवी की स्तुति में गाये जाते हैं.लंगूरिया लोकगीत काल-भैरव जो कैला देवी का गण है,को सम्बोधित करते हुए गाये जाते हैं.लंगूरियानटखट प्रेमी के रूप में भक्ति काव्य में श्री कृष्ण का वाचक हो जाता है इसी लिए ये गीत बडे रसीले  मनोरंजक होते हैं.भारतीय लोक संस्कृति मेंलंगूरिया का विशेष स्थान रहा है,देवी के इन गीतों में नर-नारियों के मनोभावों के दर्शन होते हैं  श्रद्धा  भक्ति के साथ भरपूर मनोरंजन भीछलकता है.तो लीजिए प्रस्तुत है इक लंगूरिया गीत.


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दर्शन कर आवे

हे रे कैला मैया को जूरो है
दरबार 
लंगूरिया चलो तो दर्शन कर आवे

हे रे झूला डालो है करोलि के 
महल 
लंगूरिया चलो तो दर्शन कर आवे

काहे को याको बनो है पलनो
काहे की या की डोर 
लंगूरिया चलो तो दर्शन कर आवे

सोने को याको बनो पलनो 
रेशमी या की डोर 
लंगूरिया चलो तो दर्शन कर आवे

लगा है मेला 
लगा है कैला मैया का दरबार 
लंगूरिया चलो तो दर्शन कर आवे.

Tuesday, 12 March 2019

“नकटा”



  
“नकटा” ये भी एक विधा है लोक संगीत की,जो की बहुत ही मनोरंजक व लोक प्रिय है. पहले तो लगता है मैं अर्थ समझा दूँ की नकटा होता क्या है.असल में ये शब्द भी लोक भाषा का ही है.जैसा की सर्व विदित है की उत्तर-प्रदेश की लोक कलाओं में नाटक और नौटंकी ही सर्वाधिक लोकप्रिय रहे हैं,और ये नकटा शब्द यहीं से आता है. इसके गीत बडे ही रसीले,चुलबुले और छेड़-छाड़ से भरे होते हैं.अब देखते हैं की इनका विकास और प्रासंगिकता कहाँ से शुरू होती है. ये मूलतः स्त्रियों द्वारा ढोलक के साथ गया जाने वाला गीत होता है...साथ ही इस पर नृत्य या जैसा की इस का नाम ही परिभाषित करता है अभिनय या नाटक भी किया जाता है.
पहले ज़माने में जब विवाह होता था,विशेषकर लड़कों का और बारात चली जाती थी,और तब बारात में स्त्रियाँ नहीं जाती थीं और बारात भी कम से कम दो या तीन दिन के लिए जाती थीं,तब घर में परिवार व तमाम रिश्तेदारी की स्त्रियाँ ही रह जाती थी और वे मनोरंजन के लिए रतजगा जैसे कार्यक्रम करती थीं. पूरी-पूरी रात गाने-बजाने का कार्यक्रम होता रहता था और तब नकटा का बड़ा ही महत्वपूर्ण स्थान होता था. चुटीले से गीतों पर स्त्रियाँ प्रहसन व मंचन करती थीं,उन्ही स्त्रियों में से कोई पुरुष रूप भी बना कर आती थीं....हालाँकि परदा प्रथा भी थी तो स्त्रियाँ लम्बे घूँघट भी किए रहती थी...इस में मज़े की बात ये भी थी की कई बार पता भी नहीं चलता था की किस की बहू कब क्या सुना गयी अपनी सास ननद को गीतों के माध्यम से.सबसे रोचक किसी स्त्री का पुरुष बहुरूप बना कर आना व विनोद भरा दृश्य गीत के साथ अभिनय व मंचन कर के दिखाना होता था,इस में हास्य व कटाक्ष का बड़ा ही सुंदर मिश्रण होता था. नकटा सिर्फ़ इसी अवसर पर नहीं बल्कि शादी-विवाहों के कई और अवसरों पर गाया जाता है.अगर आप ग़ौर करें तो पायेंगे की हमारी छोटी सी भी परंपरा या विधी के पीछे कोई ना कोई logical कारण होता है,जहाँ नकटा गा-बजा कर और रतजगा कर परिवार भर की स्त्रियाँ मनोरंजन करती थीं वहीं ये सुरक्षा की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण था,जैसा की मैंने पहले ही बताया सभी पुरुष बारात में चले जाते थे....तो गाँव में चोरी और डकैती का बड़ा डर होता था,तो रात भर जाग कर ये सब मनोरंजन के साथ अपनी सुरक्षा भी कर लेती थीं.ऐसी अनूठी थीं हमारी लोक कलायें व परम्परायें.आप ने भी अपनी दादी नानी से ऐसे कुछ क़िस्से ज़रूर सुने होंगे.
तो चलिए,ले चलते हैं आप को नकटा गीतों की अद्भुत व रसीलि दुनिया में...आशा है आप को पसंद आयेंगी.

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“मोरे बारे बलमवा”




आवे दा मोरे बारे बलमवा के
आवे दा....२
इक इक में दुई दुई लगाई देबो
हाँ इक इक में....२
आवे दा...२

अपने खाबे पूरी मिठाई
अपने खाबे...२
बलमू के थरिया सजाई देबो
हाँ बलमू...२
सासु जी के उहे टिकरिया
सासु जी के...२
उपरा से चटनी लगाई देबो
हाँ उपरा से....२

आवे दा मोरे बारे बलमवा के
इक इक में...२

अपने रहबे कोठी अटारी
अपने रहबे...२
परदेसी के बंगला छबाई देबो
परदेसी के....२
सासु जी के उहे झोपड़ियाँ
सासु जी के....२
निचवा से माचिस दिखाई देबो
हाँ निचवा से...२

आवे दा मोरे बारे बलमवा के
इक इक में....२

अपने चलबे मोटर कार
अपने चलबे...२
बलमू के साइकिल दिलाई देबो
हाँ बलमू के...२
सासु जी के उहे बैल गड़िया
सासु जी के....२
पिछवा से कुकूर दौराई देबो
हाँ पिछवा से...२

आवे दा मोरे बारे बलमवा के
आवे दा...२
इक इक में दुई दुई लगाई देबो
हाँ इक इक...२
आवे दा मोरे बारे बलमवा के
इक इक...२

                                 
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“अँगूठिया”


कौनो हमरी अँगूठिया चुराई ले गैले
कौनो हमरी...२

हमरी अँगूठिया पिया की निशनिया
हमरी अँगूठिया....२
कौनो पिया की निशनिया चुराई
ले गैले
कौनो पिया की...२
कौनो हमरी....२

हमरी खिड़कियाँ पिया की दुआरिया
हमरी खिड़कियाँ....२
कौनो नैना से नैना लड़ाई ले गैले
कौनो नैना से...२
पिया नैना से नैना लड़ाई ले गैले
कौनो हमरी...२

हमरी चुनरिया पिया की पगड़िया
हमरी चुनरिया...२
कौनो रंग में रंग मिलाई ले गैले
कौनो रंग में....२
कौनो हमरी....२
कौनो पिया की निशनिया चुराई ले गैले
कौनो हमरी...२

हमरी नंदिया पिया की बहिनिया
हमरी नंदिया...२
कौनो पुलिस दरोग़ा भगाई ले गैले
कौनो पुलिस दरोग़ा....२
कौनो हमरी नंदिया भगाई ले गैले
कौनो हमरी....२

कौनो हमरी अँगूठिया चुराई ले गैले
कौनो हमरी...२
हमरी अँगूठिया पिया की निशनिया
कौनो पिया की निशनिया चुराई ले गैले
कौनो हमरी....२



                                        
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“नीली सारी”

गोरा बदन नीली सारी
मैं सारी वाली
गोरा बदन...२

सडिया पहन मैं बग़ियो गयी थी
सडिया पहन....२
मलिया ने हँस के मारा ताली
मैं सारी वाली
मलिया ने....२
गोरा बदन.....२

सडिया पहन मैं क़ुवनो गयी थी
सडिया पहन....२
महारा ने हँस के मारा ताली
मैं सारी वाली
महरा ने....२
गोरा बदन....२

सडिया पहन मैं महलों गयी थी
सडिया पहन...२
राजा ने हँस के दिया गाली
मैं सारी वाली
राजा ने....२
गोरा बदन....२

गोरा बदन नीली सारी
मैं सारी वाली
गोरा बदन....२

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“पिया के बोलिया”

रस घोर घोर पियवा के बोलिया लागेला
रस घोर घोर....२
ऐ हो सासु के बोलिया कैसन लागेला
ऐ हो सासु....२
जैसे निमिया पतैया तितैया लागेला
जैसे निमिया....२

रस घोर घोर पियवा के बोलिया लागेला
रस घोर घोर...२
ऐ हो नन्दि के बोलिया कैसन लागेला
ऐ हो नन्दी....२
जैसे कूनैन के गोलीया तितैया लागेला
जैसे कूनैन...२

रस घोर घोर पियवा के बोलिया लागेला
रस घोर घोर...२
ऐ हो जेठनी के बोलिया कैसन लागेला
ऐ हो जेठनी...२
जैसे ज़हर बूराईल तिरिया लागेला
जैसे ज़हर....२

रस घोर घोर पियवा के बोलिया लागेला
रस घोर घोर....२
ऐ हो देवर के बोलिया कैसन लागेला
ऐ हो देवर....२
जैसे कोयल के बोलिया मीठिया लागेला
जैसे कोयल...२

रस घोर घोर पियवा के बोलिया लागेला
रस घोर घोर...२
ऐ हो सासु के बोलिया कैसन लागेला
जैसे निमिया पतैया तितैया लागेला
रस घोर घोर....२



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“दई के पान”

दई के पान हमारा मन मोह लिया
दई के पान....२
दई के हाँ..दई के पान....२

कहाँ से आया कत्था चूना
कहाँ से आया पान
कहाँ से...२
कहाँ की गोरी कहाँ का जवान
हमारा मन....२
दई के पान.....२

दिल्ली से आया कत्था चूना
बनारस से पान
दिल्ली से...२
बोम्बे की गोरी लाहौर का जवान
हमारा मन...२
दई के पान...२

कहाँ रखूँ कत्था चूना
कहाँ रखूँ पान
कहाँ रखूँ.....२
कहाँ सोवे गोरी कहाँ पे जवान
हमारा मन...२
दई के.....२

हंडिया रखूँ कत्था चूना
डलिया रखूँ पान
हंडिया रखूँ....२
सेज सोवे गोरी बग़ल में जवान
हमारा मन...२
दई के....२

दई के पान हमारा मन मोह लिया
दई के पान....२
दई के हाँ...दई के पान
हमारा मन मोह लिया
दई के....२


“मोर पिया”

झूमत आवे ताड़ी खनवा से मोर पिया
झूमत आवे...२
मोर पिया मोर पिया
मोर पिया...२


हमरे पिया जी की लम्बी लम्बी ज़ुल्फ़ें
हमरे पिया...२
झटकत आवे ताड़ी खनवा से मोर पिया
झटकत आवे....२

झूमत आवे ताड़ी खनवा से मोर पिया
झूमत आवे...२
मोर पिया मोर पिया
मोर पिया...२

हमरे पिया जी की लम्बी लम्बी धोतियाँ
हमरे पिया...२
उलझत आवे ताड़ी खनवा से मोर पिया
उलझत आवे....२

झूमत आवे ताड़ी खनवा से मोर पिया
झूमत आवे..२
मोर पिया मोर पिया
मोर पिया...२

हमरे पिया जी की बड़ी बड़ी अँखिया
हमरे पिया...२
मारत आवे ताड़ी खनवा से मोर पिया
मारत आवे....२

झूमत आवे ताड़ी खनवा से मोर पिया
झूमत आवे...२
मोर पिया मोर पिया
मोर पिया....२
झूमत आवे....२

Monday, 15 October 2018

“नवरात्रि श्रिंखला”- भक्ति के रंग गरबा और डांडिया के संग !



एक बार पुनः शारदीय नवरात्रि के आगमन पर आप सभी को असीम शुभकामनायें.

ये नवरात्रि अपने साथ जीवन में ख़ुशियों के अनेक रंग व साधन ले कर आती है.
जहाँ एक ओर मौसम में ख़ुशनुमा ठंड होती है वहीं जगह-जगह दुर्गा पूजा की धूम 
मची रहती है.उत्तर भारत में तो छोटे-बडे हर शहर में और हर स्तर की रामलीला का
 भी आयोजन होता है और इन सभी कार्यक्रमों को और भी रंगीला बनाता है 
जगह-जगह मेले का मौज और शोरगुल.घर-घर में कलश स्थापना और स्त्रियों की 
टोली का मस्ती में देवी गीत गाना एक अलग ही समा बाँधता है,इन सब के अलावा
 नवरात्रि का एक और अनूठा बहुत लोकप्रिय व मोहक रंग है “गरबा” नृत्य व संगीत.
गरबा मूलरूप से गुजरात प्रांत का लोक संगीत है किन्तु ये गीत और नृत्य इतने 
मनमोहक होते हैं कि अब तो लगभग पूरे देश में बहुत उत्साह से लोग इसका 
आनंद लेते हैं.नवरात्रि पर विशेष तौर पर गरबा गीत व नृत्य का आयोजन किया 
जता है,स्त्री व पुरुष जोड़ियाँ बना कर पुरे group के साथ नाचते-गाते हैं.
इस में डांडिया भी होता है और ये भी बहुत लोकप्रिय है अब तो मैं देखती हूँ प्रायः 
हर शहर में डांडिया और गरबा का आयोजन किया जाता है अक्सर competition
 भी होता है और प्रदर्शन के आधार पर विजेता घोषित किया जाता है.इस गीत 
संगीत का इक और आकर्षक पहलू है इसका परिधान.स्त्री पुरुष दोनों के परिधान
 बहुत ही रंगीन और सुंदर कढ़ाई से शोभित होते हैं,उस पे antique ज़ेवर गहने 
चार चाँद लगाते हैं.हाथों में डांडिया लिए सजे धजे लोग जब शाम को गोला बना 
कर ढोल-ताशे की धुन पर इक साथ थिरकते हैं तो ऐसा समा बँधता है की शब्दों 
में वर्णन करना कठिन है.गरबा में प्रचलित लोक गीत इतने आकर्षक होते हैं कि 
आप के पैर ख़ुद ही मचलने लगते हैं,नाच के लिये.समय के अनुसार इस के रूप में 
भी बहुत परिवर्तन आया है.पहले लोग स्वयं गाते बजाते थे और अब पहले से 
recorded गाने speakers पर बजा कर इसका आनंद लेते हैं.सामान्य तौर पर 
गरबा और डांडिया में बजने वाले गीत गुजराती भाषा में होते हैं पर इस बार मैं आप
 सब के लिये कुछ हिन्दी गरबा के लोक गीत लायी हूँ जिससे आप सब इस 
नवरात्रि में enjoy कर सकते हैं.

                
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“मैया के रंग”

मैं तो गरबा रचाऊँगी
मैया के रंग,रंग जाऊँगी...२
मेरी अम्बा का प्यार मेरी माँ 
का दुलार
अर्ज़ी सुनेंगी माँ जगदम्बे
मैं तो मंदिर में जाऊँगी
माँ की जोत जलाऊँगी
मैं तो गरबा रचाऊँगी
मैया के रंग....२

आँगन बहारूँगी जोत सवाँरूँगी
माता को मैं तन मन से पुकारूँगी 
चुन चुन कलियाँ हार बनाऊँगी 
मात भवानी को हार चढ़ाऊँगी 
माँ को माला पहनाऊँगी
दीपक जोत जलाऊँगी 
मैं तो गरबा रचाऊँगी
मैया के रंग....२

कष्ट निवारेंगी माँ जगदम्बे
विनती सुनेगी अपनी भी अम्बे 
माता के हाथों में मेहंदी रचाऊँगी
लाल चुनरिया मैं माँ को ओढ़ाऊँगी 
माँ को चूड़ी पहनाऊँगी
मैं तो गरबा रचाऊँगी
मैया के रंग....२

हलवा बनाऊँगी भोग लगाऊँगी 
लँगर में भक्तों को भोज कराऊँगी 
नाचूँगी गाऊँगी सबको नचाऊँगी 
नाच नाच मैं तो मैया को रिझाऊँगी 
वर अम्बे का पाऊँगी 
भव से मैं तर जाऊँगी मैं तो गरबा रचाऊँगी 
मैया के रंग,रंग जाऊँगी...२


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“ओढ़नी उड़ी जाय”

ओढ़नी ओढ़ूँ तो उड़ी उड़ी जाय
अरे ये के हुयो अरे काये हुयो....२
ओढ़नी ओढ़ो जी गोरी संभाल
ओढ़नी सर सर सरकी जाय....२

थारो गोरा सा तन हुए तपती किरन
थारो नाज़ुक बदन कुम्हलाय...२
ओढ़नी ओढ़ूँ तो उड़ी उड़ी जाय
अरे ये के हुयो....२
ओढ़नी ओढ़ो जी गोरी सम्भाल
ओढ़नी सर....२

ऊँची नीची तेरी डगरिया
थक जाय माँ पावँ रे
पहली बार चली हूँ माँ
ले के थारो नाम रे...२
ऊँची नीची.....२
ओढ़नी ओढ़ूँ तो उड़ी उड़ी जाय
अरे ये के हुयो...२
ओढ़नी ओढ़ो जी गोरी सम्भाल
ओढ़नी सर...२

कोई सपना में आवे मेरी नीदे उडावे
कोई सपना में...२
दिल धक धक धड़को जाय
दिल धक...२
ओढ़नी ओढ़ूँ तो उड़ी उड़ी जाय
अरे ये के हुयो....२
ओढ़नी ओढ़ो जी गोरी सम्भाल
ओढ़नी सर...२

उड़तो उड़तो मन को पंछी
थारे गाँव में आयो...२
चाँद सरीखा मुखड़ा थारो
नैन मन में समायो...२
या साँची है बात ये जुग जुग
रो साथ...२
अब क़ुणे थारो समझाय
ओढ़नी ओढ़ूँ तो उड़ी उड़ी जाय
अरे ये के हुयो...२
ओढ़नी ओढ़ो जी गोरी सम्भाल
ओढ़नी सर सर सरकी जा ओढ़नी ओढ़ूँ तो....।

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“पीहर चोखो”

ओ माने पीहर भालो लागे
मैं नहीं जाऊँ सासरियो...२
नहीं जाऊँ सासरियो मैं नहीं
जाऊँ सासरियो
ओ माने पीहर....२

सासरे में मेरी सासु जी खोटी....२
ओ माने रोज़ रोज़ पीसड़ पीसावे
मैं नहीं जाऊँ...२
ओ माने पीहर...२

सासरे में मेरा ससुरा जी खोटा...२
ओ माने रोज़ रोज़ घूँघट कढावे
मैं नहीं जाऊँ...२
ओ माने पीहर...२

सासरे में मेरी नंदूलि खोटी...२
ओ माने रोज़ रोज़ पाणि भरावे
मैं नहीं जाऊँ...२
ओ माने पीहर...२

सासरे में मेरी जेठनी खोटी...२
ओ मा पे घड़ी घड़ी हुकुम चलावे
मैं नहीं जाऊँ....२
ओ माने पीहर...२